➤ टांडा मेडिकल कॉलेज में आठ सैंपलों की जांच में चार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई
➤ संक्रमितों में सात माह और एक साल के दो बच्चों के साथ 72 और 85 वर्ष के बुजुर्ग शामिल
➤ अस्पताल प्रशासन अलर्ट, सर्दी-जुकाम और बुखार जैसे लक्षणों पर मास्क व जांच की सलाह
धर्मशाला। दिल्ली में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच अब हिमाचल प्रदेश में भी स्वाइन फ्लू की दस्तक हो गई है। कांगड़ा जिले के डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज टांडा में बुधवार को स्वाइन फ्लू के चार मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन अलर्ट हो गया है। खास बात यह है कि संक्रमितों में दो छोटे बच्चे और दो बुजुर्ग शामिल हैं।
टांडा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा के अनुसार अस्पताल में स्वाइन फ्लू की आशंका को देखते हुए कुल आठ सैंपलों की जांच की गई थी। इनमें से चार सैंपलों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। संक्रमित मरीजों में कांगड़ा जिले के सात माह और एक वर्ष की उम्र के दो मासूम बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा चंबा जिले के 72 और 85 वर्ष के दो बुजुर्गों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण की पुष्टि होने के कारण स्वास्थ्य स्तर पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
टांडा में आठ सैंपल, चार निकले पॉजिटिव
टांडा मेडिकल कॉलेज में संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए लिए गए थे। जांच के दौरान आठ सैंपलों में से चार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इससे साफ है कि जिले में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की जांच को लेकर अस्पताल प्रशासन सतर्कता बरत रहा है।
संक्रमितों की उम्र को देखते हुए भी मामला महत्वपूर्ण है। सात माह और एक वर्ष के दो बच्चे तथा 72 और 85 वर्ष के दो बुजुर्ग संक्रमण की चपेट में आए हैं। बच्चों और बुजुर्गों में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है, इसलिए ऐसे मरीजों में लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई है।
सर्दी-जुकाम और बुखार को हल्के में न लें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू में बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में नाक बहने या नाक बंद होने, कमजोरी, बेचैनी, मतली या उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है।
हर संक्रमित व्यक्ति में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। कई मामलों में संक्रमण हल्का रहता है और उचित आराम तथा चिकित्सकीय देखभाल से मरीज ठीक हो जाता है। वहीं, गंभीर लक्षण सामने आने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
टांडा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सर्दी, जुकाम, बुखार या गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई देने पर सावधानी बरतें। ऐसे लक्षण होने पर मास्क का इस्तेमाल करें, भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचें और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय जांच करवाएं।
पहले आईजीएमसी में सामने आया था संदिग्ध मामला
हिमाचल में इससे पहले आईजीएमसी शिमला में स्वाइन फ्लू का एक संदिग्ध मामला सामने आया था। हालांकि, जांच के बाद संबंधित मरीज की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अब टांडा मेडिकल कॉलेज में चार मामलों की पुष्टि होने के बाद प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत बढ़ गई है।
क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाला एक संक्रामक श्वसन संक्रमण है। इसे आम तौर पर एच1एन1 इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने पर संक्रमण फैल सकता है।
फ्लू जैसे लक्षण इस संक्रमण में आम तौर पर दिखाई देते हैं। कुछ लोगों में बीमारी हल्की रहती है और आराम तथा उचित देखभाल के बाद स्थिति में सुधार हो जाता है। वहीं, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप भी ले सकता है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण क्या हैं
स्वाइन फ्लू के लक्षण कई बार अचानक दिखाई दे सकते हैं। इनमें तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना और अत्यधिक थकान प्रमुख हैं।
इसके अलावा नाक बहना या नाक बंद होना, कमजोरी और बेचैनी भी हो सकती है। कुछ मरीजों में मतली या उल्टी जैसी परेशानी भी देखने को मिल सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।
इन लक्षणों पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें
अगर बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या लगातार हालत बिगड़ने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना उचित नहीं है।
स्वाइन फ्लू का इलाज मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और लक्षणों की गंभीरता के आधार पर किया जाता है। हल्के लक्षणों वाले मरीजों को पर्याप्त आराम करने और शरीर में पानी की कमी न होने देने की सलाह दी जाती है। बुखार और शरीर में दर्द जैसी परेशानी के लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवा तय कर सकते हैं।
गंभीर संक्रमण या अधिक जोखिम वाले मरीजों में डॉक्टर एंटीवायरल दवा देने का निर्णय ले सकते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी दवा का इस्तेमाल करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।
बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी
टांडा में सामने आए चार मामलों में दो मासूम बच्चों और दो बुजुर्गों के संक्रमित पाए जाने के बाद इन आयु वर्गों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी हो गई है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग और लंबे समय से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर जल्द चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
फिलहाल टांडा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। ऐसे में लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि घबराने के बजाय सावधानी बरतें, लक्षणों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच व चिकित्सकीय सलाह लें।



